साल 1975 में यह योजना बनी थी, जो साल 2013 में बंद हो गई. इस योजना को दोबारा शुरू करने व उच्च क्षमता का प्लांट बनाने के लिए डीपीआर तैयार की गई है. इसके मुताबिक इस परियोजना को 3 मेगावाट तक बढ़ाए जाने की संभावना थी, जिसके लिए 21 करोड़ रुपये की लागत दिखाई गई.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी http://bit.ly/2EH8vw1
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