वन ग्रामों के ग्रामीण अंग्रेजों के दौर से वन विभाग की जमीन पर बसे हुए हैं. लेकिन कानूनी रूप से इन गांव वालों को जमीनों का मालिकाना हक आज तक हासिल नहीं हो पाया है. कड़े वन कानूनों और राजनेताओं में इच्छाशक्ति की कमी के चलते 21वीं सदी में भी वन ग्रामों के लोग बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. पंचायती राज के दौर में ये गांव ग्राम पंचायतों से महरूम हैं. इन गांवों को राजस्व गांव बनाकर विकास की मुख्य धारा में लाने की बजाय इन्हें खोखले वादों से बहलाया जाता रहा है.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी https://ift.tt/2rnKRNh
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