पहाड़ में आम जीवन जितना मुश्किल है, उससे कहीं ज्यादा कठिन है, यहां मतदान कराना. खासकर सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में. यहां 8 अप्रैल को पोलिंग पार्टियां मतदान स्थलों के लिए रवाना हो गईं थीं. लेकिन 11 अप्रैल को मतदान हो जाने के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी सभी पोलिंग पार्टियां मुख्यालय नहीं लौट पाई हैं.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी http://bit.ly/2IBPrBp
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