वर्ष 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में शुक्रवार को एक चिकित्सा पेशेवर अपने बयान से मुकर गया, जिसके बाद अब तक इस मामले के कुल 35 गवाह मुकर चुके हैं. गवाह ने महाराष्ट्र पुलिस के आतंकवाद-रोधी दस्ते (एटीएस) को कथित तौर पर बताया था कि वह अप्रैल 2008 में भोपाल में एक बैठक में शामिल हुआ था, जहां लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित कुछ आरोपी मौजूद थे.
एटीएस द्वारा दर्ज किए गए बयान के अनुसार, संगठन ‘अभिनव भारत' की इस बैठक में पुरोहित ने ‘‘गुरिल्ला युद्ध और मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई करने के बारे में चर्चा की थी.''
हालांकि, बाद में मामले की जांच संभालने वाले राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को दिए गए अपने बयान में गवाह अपने दावों से मुकर गया. शुक्रवार को गवाह अदालत में मौजूद अभियुक्तों को पहचानने में विफल रहा और उसने एटीएस या एनआईए को कोई भी बयान देने से इनकार किया. इसके बाद अदालत ने उसे मुकर हुआ गवाह घोषित कर दिया.
उल्लेखनीय है कि 29 सितंबर, 2008 को उत्तरी महाराष्ट्र के मालेगांव शहर में एक मस्जिद के पास मोटरसाइकिल पर रखे विस्फोटक उपकरण में धमाका होने से छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे.
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