बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने नीट ‘प्रश्नपत्र लीक' की जांच तेज करते हुए रविवार को पांच और संदिग्धों को गिरफ्तार किया. इन आरोपियों को एक दिन पहले झारखंड के देवघर से हिरासत में लिया गया था. इसके साथ ही मामले में अब तक 18 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब सीबीआई ने पांच मई को आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में कथित अनियमितताओं के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की है. नीट-यूजी का प्रश्नपत्र लीक होने के दावों के साथ छात्रों द्वारा देश भर में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है.
नालंदा के रहने वाले हैं
ईओयू के एक बयान के अनुसार, गिरफ्तार किए गए पांच लोगों की पहचान बलदेव कुमार, मुकेश कुमार, पंकू कुमार, राजीव कुमार और परमजीत सिंह के रूप में हुई है. ये सभी नालंदा के रहने वाले हैं.
कई राज्यों में प्रश्नपत्र लीक करने का आरोप
कुख्यात संजीव कुमार उर्फ लुटन मुखिया गिरोह से जुड़े बलदेव कुमार को परीक्षा से एक दिन पहले नीट-यूजी परीक्षा की हल की गई उत्तर पुस्तिका कथित तौर पर उसके मोबाइल फोन पर पीडीएफ प्रारूप में प्राप्त हुई थी. बयान में मुखिया गिरोह के सदस्यों पर कई राज्यों में प्रश्नपत्र लीक करने का आरोप लगाया गया है.
पूरा मामला समझिए
इसमें कहा गया कि अब तक की जांच से पता चला है कि बलदेव और उसके साथियों ने चार मई को पटना के राम कृष्ण नगर में एक घर में इकट्ठा हुए छात्रों को हल की गई उत्तर पुस्तिकाएं वितरित कीं ताकि वे इसे याद कर लें. बयान में कहा गया कि अभ्यर्थियों को पहले से गिरफ्तार किए गए दो लोगों-नीतीश कुमार और अमित आनंद द्वारा वहां लाया गया था. बयान के अनुसार, लीक हुआ नीट-यूजी प्रश्नपत्र मुखिया गिरोह द्वारा झारखंड के हजारीबाग के एक निजी स्कूल से प्राप्त किया गया था.
ईओयू ने प्रश्नपत्रों को संभालने की जिम्मेदारी उठाने वाले कई लोगों से पूछताछ की, जिनमें बैंक अधिकारी और एक कूरियर कंपनी के कर्मचारी शामिल हैं.
पटना के भीतर आरोपियों और अभ्यर्थियों को लाने-ले जाने की सुविधा प्रदान करने के आरोप में टैक्सी चालक मुकेश कुमार को भी गिरफ्तार किया गया. बयान में कहा गया कि एनटीए द्वारा पहचाने गए 15 अभ्यर्थियों की जांच की जा रही है, जिनमें से चार से पहले ही पूछताछ हो चुकी है.
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