पहाड़ में जीवन बिल्कुल आसान नहीं है. इसकी एक और बानगी पिथौरागढ़ में देखने को मिली है. पहाड़ों में पारंपरिक जलस्रोत अब पूरी तरह सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं. आलम ये है कि आधे से अधिक धारे और नौले वक्त के साथ इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए हैं. सदियों से पहाड़ की प्यास बुझाने वाले इन पारंपरिक स्रोतों के खत्म होने से जहां एक संस्कृति रफ्ता-रफ्ता खत्म हो रही है, वहीं आने वाले दौर में पेयजल संकट को भी आमंत्रित किया जा रहा है. ऐसे में पहाड़ के लोग हर दिन चुनौतियों का सामना कर अपना जीवन बसर करते हैं.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी http://bit.ly/2Aviv8z
No comments:
Post a Comment